अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Monday, March 29, 2010

लधुकथा - नकली मुठभेड़

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डी.आई.जी. सुधांशु अपने कक्ष में आज अकेले बैठे हैं। तभी डी.वाय.एस.पी. शर्मा ने उनके कमरे में प्रवेश किया। शर्माजी आज बहुत खुश थे। उनकी प्रसन्...
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Wednesday, March 24, 2010

अपराधी को सजा हुई और सारा परिवार ही भूख की चपेट में आ गया

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कानून और इंसाफ की हम सभी प्रतिदिन दुहाई देते हैं। लेकिन जिसे न्‍याय करना है उसके सामने कई बाद चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं। एक तरफ कानून कहता ह...
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Saturday, March 20, 2010

पाँच साल की बच्‍ची के गर्दन पर साँप लिपटा था

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उई ई ई ई की चीख मेरे कानों में पड़ी और एक धम्‍म की आवाज भी। तभी दूसरी चीख सुनायी दी। मैं लथपथ सी उस ओर भागी। देखा कि बेटी और बहु एक दूसरे को ...
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Thursday, March 18, 2010

हमारे लेखन का भविष्‍य?

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हम रोज ही कितना कुछ लिखते हैं। अपने लिखे को लेकर झगड़ा भी करते हैं। कभी कोई हमारे साहित्‍य की चोरी कर लेता है तो हम उसे धमकाते भी हैं। कभी को...
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Monday, March 15, 2010

कभी कुटिल व्‍यक्ति भी आपको सफलता दिला देते हैं

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कभी आप किसी महत्‍वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं और आप अपने कार्य द्वारा मंजिल प्राप्‍त करना चाहते हैं। लेकिन देखते हैं कि कोई एक व्‍यक्ति आपके पीछ...
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Friday, March 12, 2010

ना मेल हैं और ना ही फीमेल – संस्‍मरण

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हम ट्रेन में अपनी आरक्षित बर्थ पर पसर कर इत्मिनान से बैठ चुके थे। यह उस जमाने की बात हैं जब आरक्षण के लिए स्‍टेशन पर जाकर लाइन लगानी पड़ती थी...
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Monday, March 8, 2010

संस्‍मरण – चुड़ैल समझकर लड़के डर गए

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रात गहराती जा रही थी। सड़क कब से सुनसान पड़ी थी। एक पीपल का पेड़ था जो बड़े से एक चबूतरे से मढ़ा था। उस चबूतरे पर हम तीन महिलाएं, अपनी ही दुनिया ...
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