अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Saturday, January 30, 2010

परिवारवाद बनाम केरियरवाद

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आज समाचार पत्रों में एक समाचार प्रकाशित हुआ, बी.बी.सी. ने एक सर्वे कराया कि सात मानवीय दुर्गुण यथा लोभ, ईर्ष्‍या, आलस्‍य, पेटूपन, वासना, क्र...
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Wednesday, January 27, 2010

गाँव में गणतन्‍त्र दिवस

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गणतन्‍त्र दिवस का उत्‍सव मनाया जा रहा है। बच्‍चे चबूतरे पर बैठे हैं, गाँव वाले पेड़ों के नीचे और महिलाएं अपने झोपड़े के आगे घूंघट निकालकर बैठी...
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Friday, January 22, 2010

जमाखोरों के विरोध में आम जनता को जागृत होना होगा

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कहते हैं कि सुधार सरकारे नहीं समाज करता है। लेकिन आज हम सब सरकारों के मुँह की ओर ताक रहे हैं। सरकारों को वे लोग संचालित कर रहे हैं जिनके पास...
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Friday, January 15, 2010

सुकून आता जाएगा

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अभी समीरलाल जी की पोस्‍ट आयी, "दूर हुए मुझसे वो मेरे अपने थे"। मन में कहीं उथल-पुथल सी हुई, रिश्‍तों को लेकर। मेरा यह आलेख समीर जी...
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Tuesday, January 12, 2010

तीन लघुकथाएं

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  रोटी और कुत्ते झबरा कुत्ता आराम से सो रहा था। तभी कालू कुत्ता उसके पास आया और बोला कि अरे झबरे तू बड़े आराम से सो रहा है, अभी मालिक देखें...
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Friday, January 1, 2010

एक कविता ब्‍लागर मित्रों के नाम

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नये वर्ष पर आज फिर डायरी और कलेण्‍डर बदल गए, बस नहीं बदले तो ब्‍लागर मित्र। मेरी दीवारें और टेबल खुश है, क्‍योंकि उन पर कोई नया चित्र आने वा...
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Saturday, December 12, 2009

डर कैसे बस गया जीवन में?

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बचपन शहर से दूर रेत के समन्‍दर के बीच व्‍यतीत हुआ। साँप और बिच्‍छू जैसे जीव रोज के ही साथी थे। वे बेखौफ कभी भी घर में अतिथी बन जाते थे। लेकि...
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