अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Monday, November 23, 2009

कविता - सिंह-वाली बाहर होगी

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मैं विगत एक सप्‍ताह से उदयपुर के बाहर थी अत: इस ब्‍लोग जगत से बाहर थी। क्‍या नया पोस्‍ट करूँ इसी उधेड़-बुन में एक कविता कुछ दिन पहले की लिखी ...
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Thursday, November 12, 2009

पुत्र-वधु के आगमन पर - आज चिरैया आ पहुँची

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मुझे आज वह दिन स्‍मरण हो रहा है, जब मेरी पुत्र-वधु मेरे घर में आ रही थी। बेटे के चेहरे पर खुशी फूटी पड़ रही थी। घर की दीवारे भी जैसे चहक रही ...
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Saturday, November 7, 2009

हम अपनी छवि में कैद हैं

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कभी आप बेहद उदास हैं, उदासी भी आपकी निजी है। मन करता है कि दुनिया को बता दें कि आप क्‍यों उदास हैं फिर लगने लगता है कि आपने तो दुनिया के साम...
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Wednesday, November 4, 2009

अंग्रेजी खूनी पंजे-2

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भारत में अकाल पड़ने का इतिहास हमेशा मिलता रहा है। लेकिन मृत्यु का इतना बड़ा आंकड़ा अंग्रेजों के काल में ही उपस्थित हुआ। गरीब जनता की मृत्यु इसल...
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Monday, November 2, 2009

अंग्रेजी खूनी पंजे

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अभी अदा जी की एक पोस्‍ट आयी, हमारी राष्‍ट्रपति के इंग्‍लैण्‍ड दौरे को लेकर। भाई प्रवीण शाह ने अपनी टिप्‍पणी में लिखा कि अंग्रेजों ने हमें बह...
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Friday, October 30, 2009

जीवन में सपने मत देखो

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कई बार मन उदास हो जाता है। जीवन में अघटित सा होने लगता है। ऐसे ही क्षणों में कुछ शब्‍द आकर कहते हैं कि जीवन में सपने मत देखो, इनके अन्‍दर सत...
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Saturday, October 24, 2009

कविता - तुम ही दीप जला जाती हो

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गीला-गीला मन होता जब तुम आकर बस जाती हो रीता-रीता मन होता जब झोंका बन छू जाती हो। मेरी चौखट, तेरे चावल मुट्ठी भर से सज जाती है अपने पी के धा...
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