अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Wednesday, September 23, 2009

जनजातीय गाँव - 2

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मौसम कुछ-कुछ खुशगवार था, सोचा कि किसी गाँव में घूम आया जाए। अभी भुटटो का भी मौसम था तो सोचा गया कि किसी के खेत पर जाकर ताजे भुट्टो का मजा लि...
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Monday, September 21, 2009

एक जनजातीय गाँव

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उदयपुर से तीस किलोमीटर दूर बसा एक गाँव – अलसीगढ़। आज यहाँ गवरी का समापन है। रक्षाबंधन के बाद से पूरे सवा महिने तक चलने वाला पर्व है गवरी। इसम...
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Monday, September 14, 2009

नवगीत - बिखर पड़ा मन

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सिमट गए दायरे बिखर पड़ा मन बगियाँ के सामने ठिठक खड़ा वन। बरगद है गमले में कुण्‍डी में जामुन सुआ है पिंजरे में बिल्‍ली है आँगन छाँव गंध नायरे प...
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Monday, August 24, 2009

कविता - बिटिया, तुम आ गयी?

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आज मेरी बिटिया कनुप्रिया का जन्‍मदिन है। यह जन्‍मदिन तब और खास बन जाता है जब उसकी गोद में भी एक नन्‍हीं सी बिटिया हो। कुछ पंक्तियां मैं गुनग...
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Saturday, July 25, 2009

लोरी - गुब्‍बारे में सैर करूँगी

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अपनी नाती के लिए एक लोरी बनायी थी। सोचा कि सभी नाती , पोतों के काम आएगी तो यहाँ पोस् ‍ ट कर रही हूँ। आप सभी की प्रति...
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Thursday, July 2, 2009

नवगीत - एक गाँव में देखा मैंने

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एक गाँव में देखा मैंने सुख को बैठे खटिया पर अधनंगा था, बच्‍चे नंगे, खेल रहे थे मिटिया पर। मैंने पूछा कैसे जीते वो बोला...
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Thursday, June 25, 2009

पुस्‍तकों का प्रकाशन

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आदरणीय विगत तीन माह में मेरी चार पुस्‍तकों का प्रकाशन हुआ है। अरण्‍य में सूरज ( उपन्‍यास) - सामयिक प्रकाशन दिल्‍ली, सोने का पिंजर.. अमेरिका ...
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