अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Saturday, January 31, 2009

सोने का पिंजर....अमेरिका और मैं

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पढ़े हिन्‍दयुग्‍म.कॉम के बैठक अध्‍याय के अन्‍तर्गत सोने का पिंजर की तीसरी कडी।
Wednesday, January 21, 2009

जो औरत है, वो बेचारी कैसे?

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अर्चना अंतरराष्‍ट्रीय ख्‍याति प्राप्‍त एक सॉफ्‍टवेयर कंपनी में ऊँचे पद पर है। उसका एक पाँव देश में, तो दूसरा विदेश में रहता है। वह एक ऐसी यु...
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Tuesday, January 20, 2009

ओबामा के मायने

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अपनी जड़ों से उखड़ने का दर्द शायद इतना गहरा नहीं होता जितनी गहरी वह टीस होती है, जब हमें हर क्षण यह अनुभव कराया जाता हो कि तुम पराए हो। आज से ...
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Wednesday, January 14, 2009

लघु कथा

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प्रेम का पाठ सरस्वती अकेली बैठी है, उसकी आँखों में आँसू हैं। कभी धुंधली होती रोशनी से अपने बुढ़ापे को देख रही है, कभी जंग लगते अपने घुटनों को...
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Monday, January 12, 2009

पूछती है इन्दर की माँ

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पूछती है इन्दर की माँ मेरे पास का एक गाँव वहाँ रहने वाली एक माँ खोए बेटे इन्दर की माँ! जब भी वहाँ जाती हूँ मेरे बेटे का सुराग मिला? पूछती है...
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Thursday, January 8, 2009

अपने देश में तुम आना

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विदेश में बसे भारतीयों के लिए पीर गंध की जगने पर हूक उठे तब तुम आना मन के डगमग होने पर अपने देश में तुम आना। सन्नाटा पसरे मन में दस्तक कोई द...
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Monday, January 5, 2009

पाती

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पाती परदेस बसे बेटे ने स्याही की खुशबू से लिपटी माँ के हाथों की पाती माँगी अँगुली के पोरों से बाँध कलम को शब्दों से झरती ममता को छूने की मंश...
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