Friday, July 13, 2012

हम प्रतिदिन जहर पी रहे हैं तो प्रेम कहाँ से उपजेगा?



सुबह की पहली किरण के साथ ही एक भूख जन्‍म लेती है, दुनिया को जानने की, अपने आस-पास हो रही गतिविधियों को समझने की और घटनाओं से अपने आपको सावधान करने की। इसलिए दरवाजे पर दस्‍तक दे रहा समाचार-पत्र तत्‍काल ही हाथ में आ जाता है। समाज और देश की सारी विद्रूपताएं एकत्र होकर उन पन्‍नों में समायी होती हैं। ------ शेष पोस्‍ट पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें - www.sahityakar.com 

Saturday, July 7, 2012

अभिव्‍यक्ति को मार्ग दो, नहीं तो वह विस्‍फोट में बदल जाएगी

अभिव्‍यक्ति को मार्ग दो, नहीं तो वह विस्‍फोट में बदल जाएगी  -  पोस्‍ट का सम्‍पूर्ण रूप से पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं - www.sahityakar.com 

Thursday, June 28, 2012

मेरे मरने के बाद मुझपर रोना ना कि मेरे संग्रह को समेटने के लिए

मेरे मरने के बाद मुझपर रोना ना कि मेरे संग्रह को समेटने के लिए  - पोस्‍ट को पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें - www.sahityakar.com 

Monday, June 25, 2012

ब्‍लोगिंग करे तो कैसे करें?


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Tuesday, June 19, 2012

लम्‍बी अनुपस्थिति के बाद वापसी

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Thursday, May 3, 2012

गर्मियों की छुट्टियां और मायके बनते घर

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Friday, April 27, 2012

हम अक्‍सर “यूज” होते हैं


हम अक्‍सर “यूज” होते हैं 
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